सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺 💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖 🌹❤!!#शुभ_संध्या ‎#वंदन_जी!!❤🌹💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺 🌲🌹🌷࿗ ‎#जय_श्री_राधे_कृष्णा ࿗🌷🌹🌲~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ‏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹!!श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा!!🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🥀By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब🥀🙏🙏🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀!🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿*!!फूलों में सज रहे हैं, ‏श्री वृन्दावन बिहारी।!**!!और संग में सज रही है वृषभानु की दुलारी॥* ‏🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿*!!टेडा सा मुकुट सर पर रखा है किस अदा से,!!*!!करुना बरस रही है, ‏करुना भरी निगाह से।!**!!बिन मोल बिक गयी हूँ, ‏जब से छबि निहारी॥* ‏🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿*!!बहिया गले में डाले जब दोनों मुस्कुराते,!!**!!सब को ही प्यारे लगते, ‏सब के ही मन को भाते।!**!!इन दोनों पे मैं सदके, ‏इन दोनों पे मैं वारी॥* ‏🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿*!!श्रृंगार तेरा प्यारे, ‏शोभा कहूँ क्या उसकी,!!**!!इत पे गुलाबी पटका, ‏उत पे गुलाबी साडी॥* ‏🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿*!!नीलम से सोहे मोहन, ‏स्वर्णिम सी सोहे राधा।!**!!इत नन्द का है छोरा, ‏उत भानु की दुलारी॥* ‏🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿*!!चुन चुन के कालिया जिसने बंगला तेरा बनाया,!!**!!दिव्या आभूषणों से जिसने तुझे सजाया,!!* ‏🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿 ‎*!! ‏फूलों में सज रहे हैं, ‏श्री वृन्दावन बिहारी।!* *!!और संग में सज रही है वृषभानु की दुलारी!!* ‏🌿🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿 ‎*!! ‏हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे ‎!!* *!!हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे ‎!!* ❤️🌹🌹🌼🌼🌹🌹🌼🌼🌹🌹❤️ ‎*आंसू पोंछ कर मेरे* * ‏मेरे कृष्ण ने हँसाया है मुझे ‎*🙏 ‎*मेरी हर गलती पर भी मेरे ‎* *ठाकुर ने सीने से लगाया है मुझे** ‏विश्वास क्यों न हो मुझे अपने बंसी वाले पर । ‎* *उसने हर हाल में ‎................*💓 ‎* ‏जीना सिखाया है मुझे ‎"!!*🙏 🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿 ‎❤राधे राधे❤ ‏🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿 ‎* ‏जिसकी नजरो में है श्याम प्यारे,* *वो तो रहते हैं जग से न्यारे।* * ‏जिसकी नज़रों में मोहन समाये,* *वो नज़र फिर तरसती नहीं है॥* ‏🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ 🌿🌿🌹🌹🌸🌸❤️❤️🌸🌸🌹🌹🌿🌿*🙏🏼#अलबेली_सरकार ‎#करदो_करदो_बेडा_पार 🌸 🌹🙏जय जय श्री राधे राधे जी🙏🌹💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖 🌹🌹‼️ ‎#बाल_वनीता_महील ‎_आश्रम‼️🌹🌹

🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺
 💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖
        🌹❤!!#शुभ_संध्या #वंदन_जी!!❤🌹
💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖
🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺
  🌲🌹🌷࿗ #जय_श्री_राधे_कृष्णा ࿗🌷🌹🌲
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
!!श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा!!
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🥀By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब🥀🙏🙏🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀
!🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
*!!फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन बिहारी।!*
*!!और संग में सज रही है वृषभानु की दुलारी॥*
  🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
*!!टेडा सा मुकुट सर पर रखा है किस अदा से,!!
*!!करुना बरस रही है, करुना भरी निगाह से।!*
*!!बिन मोल बिक गयी हूँ, जब से छबि निहारी॥*
    🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
*!!बहिया गले में डाले जब दोनों मुस्कुराते,!!*
*!!सब को ही प्यारे लगते, सब के ही मन को भाते।!*
*!!इन दोनों पे मैं सदके, इन दोनों पे मैं वारी॥*
  🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
*!!श्रृंगार तेरा प्यारे, शोभा कहूँ क्या उसकी,!!*
*!!इत पे गुलाबी पटका, उत पे गुलाबी साडी॥*
  🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
*!!नीलम से सोहे मोहन, स्वर्णिम सी सोहे राधा।!*
*!!इत नन्द का है छोरा, उत भानु की दुलारी॥*
   🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
*!!चुन चुन के कालिया जिसने बंगला तेरा बनाया,!!*
*!!दिव्या आभूषणों से जिसने तुझे सजाया,!!*
  🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
 *!! फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन बिहारी।!*
 *!!और संग में सज रही है वृषभानु की दुलारी!!*
 🌿🌿🌿🌼🌹🌹❤️❤️🌹🌹🌼🌿🌿
   *!! हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे !!*
   *!!हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे !!*
     ❤️🌹🌹🌼🌼🌹🌹🌼🌼🌹🌹❤️
   *आंसू पोंछ कर मेरे*
                  * मेरे कृष्ण ने हँसाया है मुझे *🙏
  *मेरी हर गलती पर भी मेरे *
                  *ठाकुर ने सीने से लगाया है मुझे*
* विश्वास क्यों न हो मुझे अपने बंसी वाले पर । *
                 *उसने हर हाल में ................*💓 
 * जीना सिखाया है मुझे "!!*🙏
     🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿
                         ❤राधे राधे❤
     🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿
      * जिसकी नजरो में है श्याम प्यारे,*
                         *वो तो रहते हैं जग से न्यारे।*
    * जिसकी नज़रों में मोहन समाये,*
                         *वो नज़र फिर तरसती नहीं है॥*
       🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
 ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
   🌿🌿🌹🌹🌸🌸❤️❤️🌸🌸🌹🌹🌿🌿
*🙏🏼#अलबेली_सरकार #करदो_करदो_बेडा_पार 🌸
        🌹🙏जय जय श्री राधे राधे जी🙏🌹
💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖💙💖
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺
💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖
    🌹🌹‼️ #बाल_वनीता_महील _आश्रम‼️🌹🌹

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

*कालिदास बोले 😗 माते पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा.*स्त्री बोली 😗 बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो। मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।*कालीदास ने कहा 😗 मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें।*स्त्री बोली 😗 तुम पथिक कैसे हो सकते हो, पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं हमेशा चलते रहते। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ।*कालिदास ने कहा 😗 मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।*स्त्री बोली 😗 तुम मेहमान कैसे हो सकते हो ? संसार में दो ही मेहमान हैं।पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम ?.(अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे)*कालिदास बोले 😗 मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें।*स्त्री ने कहा 😗 नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन हो ? (कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)*कालिदास बोले 😗 मैं हठी हूँ ।.*स्त्री बोली 😗 फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप ? (पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)*कालिदास ने कहा 😗 फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ ।.*स्त्री ने कहा 😗 नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो। मूर्ख दो ही हैं। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)*वृद्धा ने कहा 😗 उठो वत्स ! (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए)*माता ने कहा 😗 शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार । तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।.कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।शिक्षा :-विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है। दो चीजों को कभी *व्यर्थ* नहीं जाने देना चाहिए.... By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब. *अन्न के कण को* "और"*आनंद के क्षण को* 🙏Jai Mata Di🙏

🌹🌳जय श्री राधे कृष्णा जी 🌹by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब🌳शुभ संध्या वंदना जी🌹🌳🥀🌲🥀🌲🥀#🌲🥀🙏_बिहारी_जी_का_आसन_"🙏🏻🌹.बहुत समय पहले कि बात है बिहारी जी का एक परम प्रिय भक्त था। वह नित्य प्रति बिहारी जी का भजन-कीर्तन करता था।🌳🌲🥀.उसके ह्रदय का ऐसा भाव था कि बिहारी जी नित्य उसके भजन-कीर्तन को सुनने आते थे।.एक दिन स्वप्न में बिहारी जी ने उससे शिकायत करते हुए कहा, तुम नित्य प्रति भजन-कीर्तन करते हो और मैं नित्य उसे सुनने आता भी हूं... 🌹🌳🌲.लेकिन आसन ना होने के कारण मुझे कीर्तन में खड़े रहना पड़ता है, जिस कारण मेरे पांव दुख जाते है, .अब तू ही मुझे मेरे योग्य कोई आसन दे जिस पर बैठ मैं तेरा भजन-कीर्तन सुन सकू।🌲🥀.तब भक्त ने कहा, प्रभु ! स्वर्ण सिंहासन पर मैं आपको बैठा सकूं इतना मुझमें सार्मथ्य नहीं और भूमि पर आपको बैठने के लिए कह नहीं सकता। .यदि कोई ऐसा आसन है जो आपके योग्य है तो वो है मेरे ह्रदय का आसन आप वहीं बैठा किजिये प्रभु।.बिहारी जी ने हंसते हुए कहा, वाह ! मान गया तेरी बुद्धिमत्ता को... 🌲🥀.मैं तुझे ये वचन देता हूं जो भी प्रेम भाव से मेरा भजन-कीर्तन करेगा मैं उसके ह्रदय में विराजित हो जाऊंगा।🌳🌲🥀.ये सत्य भी है और बिहारी जी का कथन भी। .वह ना बैकुंठ में रहते है ना योगियों के योग में और ना ध्यानियों के ध्यान में, वह तो प्रेम भाव से भजन-कीर्तन करने वाले के ह्रदय में रहते है।।🌳.बोलिए श्री बांके बिहारी लाल की जय....🙌🌺

इंतजार के आँचल मेंसबर की आख़िरी हिचकी ले दम तोड़ रही है मेरी महुबबतपरवाह का गंगा जलबख़्श दो आख़िरी जज़्बातों को उम्मीद की चंद साँसें फूँक दोबुझते अहसासों मेंया फिर आ जाना मेरी रूखसती पेउधार माँग थोड़ी फुरसत कहीं सेलबों से अपने बंद कर देनाराह तकती मेरी आँखो को "राधा रानी"💐🌹जय जय श्री राधे।।💐🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

इंतजार के आँचल में सबर की आख़िरी हिचकी  ले दम तोड़ रही है  मेरी महुबबत परवाह का गंगा जल बख़्श दो आख़िरी जज़्बातों को  उम्मीद की चंद साँसें फूँक दो बुझते अहसासों में या फिर आ जाना मेरी रूखसती पे उधार माँग थोड़ी फुरसत कहीं से लबों से अपने बंद कर देना राह तकती मेरी आँखो को  "राधा रानी" 💐🌹जय जय श्री राधे।।💐🌹 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏