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❁══❁❁═ ══❁❁══❁❁ राधे माला किर्तन पोस्ट ❁❁══❁❁═ ══❁❁══❁हे कृष्ण🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏सुना है , आँखों मे तेरी , प्रेम समन्दर बसते हैं । फिर भी हम, एक बून्द , पानी को तरसते हैं ।🌹मिटा दो , जन्मों जन्मों की प्यास , साँवरे। 💐🪻प्रेम उत्सव मे बीत जाये , जीवन डगर प्यारे।🌹🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।भक्तो की तुमने विपदा टारी मुझे भी आके थाम मुरलीवाले।।🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा।सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा।बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी।दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी।सुबह तुम ही हो, तुम ही, मेरी शाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿रूप सलोना देख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।।🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻सखी पनघट पर यमुना के तट पर,लेकर पहुंची मटकी,भूल गई सब एक बार जब,छवि देखि नटखट की,देखत ही मैं हुई बाँवरी,उसी रूप में खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁कदम के नीचे अखियाँ मीचे,खड़ा था नन्द का लाला,मुख पर हंसी हाथ में बंसी,मोर मुकुट गल माला,तान सुरीली मधुर नशीली,तन मन दियो भिगोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹सास ननन्द मोहे पल-पल कोसे,हर कोई देवे ताने,बीत रही क्या मुझ बिरहन पर,ये कोई नहीं जाने,पूछे सब निर्दोष बावरी,तट पर काहे गई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺रूप सलोना देख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।।#Vnitaराधे राधे 🌲🙏🌲🙏🌲🙏🌲🙏🌲#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #टीम #द्वारका जी जाते हुए ◢█◈★◈■⚀■◈★◈█◣GOOD MORNING DOS ⫷▓▓▓(✴ ✴)▓▓▓ ◥█◈★◈■⚀■◈★◈ ██ ◥◤★ 💕कुछ गहरा सा लिखना था___❦︎ इश्क से ज्यादा क्या लिखूं,❦︎❣︎_____सुनो अब #जिंदगी _लिखनी है___ #तुमसे_ज्यादा क्या लिखूं..!! 🍒🌷 नस_नस मे #नशा है ते हर #सांस को तेरी ही #तलब है, ऐसे मे 🥰 अब दूर कैसे रहूँ #तुझसे तू ही #इश्क मेरा, 🥰तू ही #मोहब्बत है।❣️💞तोड़ दूँ.....सारी 🥰 “बंदिशें और 😘 तुझसे लिपट......जाऊं..!❣️💞💖सुन.....लूँ तेरी “धड़कन“🥰 और....तेरी 😘बाहों में सिमट जाऊं..!💞💞❣️छू लूँ🥰 मेरे “सांसो“ से..... तेरे “सांसो तेरी...... हर सांस में घुल 😘जाऊं..!💞 💞💖तेरे 🥰 "दिल" में... उतर कर, तेरी.... "रूह" से मिल 😘जाऊं..!!💞 #Vnita 🖤♦️━━•❣️•✮✮┼ ◢ ▇ ◣ ♥️ ◢ ▇ ▇ ▇ ▇ ◣ ◢ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ▇ ▇ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ◥ ╔══❤️═ ♥️ #कान्हा ╚══❤️═राधे रादेधे═╝♥️═╗ ◤ ◤ ◤ ◤ ▇ ◣┼✮┼✮━━♦️💖🖤💖 ❣️“ को,💖 को,💞“💖 मै,💖रा 💖🍒🌷💖❣︎◥◤◥◤ ██████◤⫸ TO

 ❁══❁❁═ ══❁❁══❁ ❁ राधे माला किर्तन पोस्ट ❁ ❁══❁❁═ ══❁❁══❁ हे कृष्ण🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सुना है , आँखों मे तेरी , प्रेम समन्दर बसते हैं ।   फिर भी हम, एक बून्द , पानी को तरसते हैं ।🌹 मिटा दो , जन्मों जन्मों की प्यास , साँवरे। 💐🪻 प्रेम उत्सव मे बीत जाये , जीवन डगर प्यारे।🌹 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। भक्तो की तुमने विपदा टारी मुझे भी आके थाम मुरलीवाले।। 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷 विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥ मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा। सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा। बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥ 💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦 मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी। दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी। सुबह तुम ही ...

छिप जा इन #आँखो में #कन्हैया कुछ पल के लिए...मैं आँख बन्द करूँ और सो जाऊँ उम्र भर के लिए..........जय श्री राधे कृष्णा जी 🍀🌹🌻शुभ संध्या वंदनम् हरि के चरणों में 🌿❤🍂जय श्री राधे कृष्णा जी 🍀🌹🌻शुभ संध्या वंदनम् हरि के चरणों 💓💓 सावली, सूरत पे , मोहन,… दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना, हो गया … मेरा …दिल दीवाना , हो गया -2सावली , सूरत पे , मोहन, …दिल दीवाना , हो गया….-2🧡🧡 💟💟💞💞एक तो , तेरे , नयन तिरछे …. , दूसरा , काजल , लगा -2तीसरा… तीसरा , नजरे मिलाना … दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गयादिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💕💕 💖💖एक तो, तेरे होठ, पतले…. , दूसरा ,लाली लगी… -2तीसरा….तीसरा , तेरा मुस्कुराना……दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💗💗 🙏🙏🙏एक तो, तेरे हाथ , कोमल ….. , दूसरा मेहँदी लगी..-2तीसरा…तीसरा , मुरली बजाना….दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2💜💜दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया 💗💗एक तो , तेरे पाँव , नाजुक … , दूसरा , पायल बंधी ….-2तीसरा…..तीसरा , घुंघरू बजाना …..दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया एक तो , तेरे भोग , छप्पन …. , दूसरा , माखन धरा …-2तीसरा….तीसरा , खीचड़े , का खाना…..दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💓💓💓💓 💖💖💖एक तो , तेरे साथ , राधा …. , दूसरा , रुक्मण खड़ी …2तीसरा …तीसरा , मीरा , का आना…..दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया❤❤ 💖💖💖एक तो , तुम , देवता हो … , दूसरा , प्रियतम मेरे ….2तीसरा … तीसरा , सपनो , में आना …दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गयाश्री श्याम आशीर्वाद ।। श्री हनुमत कृपा ।।💓💓💓💓🌺‼️श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी‼️🌺 🌺‼️हे नाथ नारायण वासुदेवा‼️🌺🌺‼️श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी‼️🌺 🌺‼️हे नाथ नारायण वासुदेवा‼️🌺🌺‼️श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी‼️🌺 🌺‼️हे नाथ नारायण वासुदेवा‼️🌺❣️#Vnita❣️❣️❣️ राधे राधे❣️❣️.. 🌷 #राधे_राधे 🌷आपना क्या है इस दुनिया मे? कहने को तो बहुत कुछ है.पर असल में लंबे समय तक है क्या? जन्म से पहले आप नहीं थे.वह बचपन जवानी जिसे आप अपना कहते थे आज कहाँ है?यह वर्तमान वाला शरीर भी कब तक रहेगा?जो नाते रिश्ते थे वे भी काफ़ी चले गये,आज भी जा रहे है.एक दिन आपका नाम,पता,धन सम्पति भी नहीं रहेंगे.आप हमेशा के लिए भुला दिये जाओगे जैसे आपने अपने पूर्वजों को खो दिया है.मोह से पिछा छुड़ाकर इस हक़ीक़त को समझने की कोशिश ज़रूर करे,अभी समय है.By वनिता कासनियां पंजाब!!┅•••⊰❉‼श्री राधे राधे ‼❉⊱•••┅*🌹💖 #जय_श्री_कृष्णा जी 💖🌹**━❀꧁श्री राधे🌹राधे🌹 जी꧂❀-----*╲\╭┓ *मेरे लिए तो .प्रेम का मतलब ही राधाकृष्ण हैं*जहाँ दो नही बस एक ही नाम हैं *राधाकृष्ण* ,जहाँ आँखे *कान्हा* की हैं, *श्रंगार राधा* का हैं,जहाँ *बंसी कान्हा* की हैं, थिरकन में *पायल राधा* की हैं, जहाँ रिश्ता नही फिर भी रुह बंधी हुई हैं,जहाँ दो नही बस एक ही नाम हैं *राधाकृष्ण* ..*जय श्री राधेकृष्णा*╭🌷 ╯ ⚛🙏⚛┗╯\╲ 🌹 #Զเधे_Զเधे_जी.....💦 ❀#_जय_श्री__कृष्ण 🌱 💥#राधे_राधे❀༄༅🌹

छिप जा इन #आँखो में #कन्हैया कुछ पल के लिए... मैं आँख बन्द करूँ और सो जाऊँ उम्र भर के लिए.......... जय श्री राधे कृष्णा जी 🍀🌹🌻 शुभ संध्या वंदनम् हरि के चरणों में 🌿❤🍂जय श्री राधे कृष्णा जी 🍀🌹🌻 शुभ संध्या वंदनम् हरि के चरणों         💓💓 सावली, सूरत पे , मोहन,… दिल दीवाना हो गया….-2 दिल दीवाना, हो गया … मेरा …दिल दीवाना , हो गया -2 सावली , सूरत पे , मोहन, …दिल दीवाना , हो गया….-2🧡🧡   💟💟💞💞एक तो , तेरे , नयन तिरछे …. , दूसरा , काजल , लगा -2 तीसरा… तीसरा , नजरे मिलाना … दिल दीवाना हो गया … सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💕💕   💖💖एक तो, तेरे होठ, पतले…. , दूसरा ,लाली लगी… -2 तीसरा….तीसरा , तेरा मुस्कुराना……दिल दीवाना हो गया … सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2 दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💗💗   🙏🙏🙏एक तो, तेरे हाथ , कोमल ….. , दूसरा मेहँदी लगी..-2 तीसरा…तीसरा , मुरली बजाना….दिल दीवाना हो गया … सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2💜💜 दिल दीवाना हो गया … मेरा …...

┅•••⊰❉‼श्री राधे राधे ‼❉⊱•••┅*🌹💖 #जय_श्री_कृष्णा जी 💖🌹**━❀꧁श्री राधे🌹राधे🌹 जी꧂❀-----*╲\╭┓ *मेरे लिए तो .प्रेम का मतलब ही राधाकृष्ण हैं*जहाँ दो नही बस एक ही नाम हैं *राधाकृष्ण* ,जहाँ आँखे *कान्हा* की हैं, *श्रंगार राधा* का हैं,जहाँ *बंसी कान्हा* की हैं, थिरकन में *पायल राधा* की हैं, जहाँ रिश्ता नही फिर भी रुह बंधी हुई हैं,जहाँ दो नही बस एक ही नाम हैं *राधाकृष्ण* ..*जय श्री राधेकृष्णा*╭🌷 ╯ ⚛🙏⚛┗╯\╲ 🌹 #Զเधे_Զเधे_जी.....💦 ❀#_जय_श्री__कृष्ण 🌱 💥#राधे_राधे❀༄༅🌹#राधा_रानी💖 के एक बार नाम लेने की कीमत #महिमाएक बार एक व्यक्ति था। वह एक संत जी के पास गया। और कहता है की संत जी, मेरा एक बेटा है। वो न तो पूजा पाठ करता है और न ही भगवान का नाम लेता है। आप कुछ ऐसा कीजिये की उसका मन भगवान में लग जाये।संत कहते है ठीक है बेटा एक दिन तू उसे मेरे पास लेकर आ जा।अगले दिन वो व्यक्ति अपने बेटे को लेकर संत के पास गया। अब संत जी उसके बेटे से कहते है की- बेटा, बोल #राधे_राधे।वो कहता है की मैं क्यू कहूँ?संत कहते है बेटा बोल- राधे राधे।वो इसी तरह से मना करता रहा और अंत में उसने कहा की मैं क्यू कहूँ राधे राधे।संत जी ने कहा- जब तुम मर जाओगे और यमराज के पास जाओगे तब यमराज तुमसे पूछगे की कभी भगवान का नाम लिया कोई अच्छा काम किया। तब तुम कह देना की मैंने जीवन में एक बार श्री राधा रानी के नाम को बोला है। बस एक बार। इतना बताकर वह चले गए।समय व्यतीत हुआ और एक दिन वो मर गया। यमराज के पास पहुंचा। यमराज ने पूछा-कभी कोई अच्छा काम किया है।उसने कहा- हाँ महाराज, मैंने जीवन में एक बार श्री जी के , #राधा_जी के नाम को बोला है। आप उसकी महिमा बताइये।यमराज सोचने लगा की एक बार नाम की महिमा क्या होगी? इसका तो मुझे भी नही पता है। यम बोले की चलो इंद्र के पास वो ही बतायेगे।तो वो व्यक्ति बोला मैं ऐसे नही जाऊंगा पहले पालकी लेकर आओ उसमे बैठ कर जाऊंगा।यमराज ने सोचा ये बड़ी मुसीबत है। फिर भी पालकी मंगवाई गई और उसे बिठाया। 4 कहार (पालकी उठाने वाले) लग गए। वो बोला यमराज जी सबसे आगे वाले कहार को हटा कर उसकी जगह आप लग जाइये।यमराज जी ने ऐसा ही किया।फिर सब मिलकर इंद के पास पहुंचे और बोले की एक बार #श्री_राधा_रानी के नाम लेने की महिमा क्या है?इंद्र बोले की महिमा तो बहुत है। पर क्या है ये मुझे भी नही मालूम। बोले की चलो ब्रह्मा जी को पता होगा वो ही बतायेगे।वो व्यक्ति बोला इंद्र जी ऐसा है दूसरे कहार को हटा कर आप यमराज जी के साथ मेरी पालकी उठाइये।अब एक ओर यमराज पालकी उठा रहे है। दूसरी तरफ इंद्र लगे हुए है। पहुंचे ब्रह्मा जी के पास। *ब्रह्मा* ने सोचा की ऐसा कौन सा प्राणी ब्रह्मलोक में आ रहा है की स्वयं इंद्र और यमराज पालकी उठा कर ला रहे है।ब्रह्मा के पास पहुंचे। सभी ने पूछा की एक बार राधा रानी के नाम लेने की महिमा क्या है?#ब्रह्मा_जी बोले की महिमा तो बहुत है पर वास्तविकता में क्या है ये मुझे भी नही पता। लेकिन हाँ भगवान *शिव जी* को जरूर पता होगा।वो व्यक्ति बोला की तीसरे कहार को हटाइये और उसकी जगह ब्रह्मा जी आप लग जाइये।अब क्या करते महिमा तो जाननी थी। पालकी की और और यमराज है, एक और इंद्र और पीछे ब्रह्मा जी है।सब मिलकर भगवान शिव जी के पास गए। और भगवान शिव से पूछा की राधा जी के नाम की महिमा क्या है? केवल एक बार नाम लेने की महिमा आप कृपा करके बताइये।भगवान शिव बोले की मुझे भी नही पता। लेकिन भगवान विष्णु जी को जरूर पता होगी।वो व्यक्ति शिव जी से बोला की अब आप भी पालकी उठाने में लग जाइये। इस प्रकार ब्रह्मा शिव यमराज_और_इंद्र चारों उस व्यक्ति की पालकी उठाने में लग गए।और विष्णु जी के लोक पहुंचे। और विष्णु से जी पूछा की एक बार राधा रानी के नाम लेने की महिमा क्या है।विष्णु जी बोले अरे! जिसकी पालनी को स्वयं मृत्य का राजा यमराज, स्वर्ग का राजा इंद्र , ब्रह्म लोक के राजा ब्रह्मा और साक्षात भगवान शिव पालकी उठा रहे हो इससे बड़ी महिमा क्या होगी। जब आपने इसको पालकी में उठा ही लिया है। सिर्फ एक बार राधा रानी" के नाम लेने के कारण तो अब ये मेरी गोद में बैठने का अधिकारी हो गया है।भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है की जो केवल ‘रा’ बोलते है तो मैं सब काम छोड़ कर खड़ा हो जाता हु। और जैसे ही कोई ‘धा’ शब्द का उच्चारण करता है मैं उसकी और दौड़ लगा कर उसे अपनी गोद में भर लेता हूँ ।🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼श्री मन्न नारायण के श्री चरणों में जो बैठती हैं वह माँ महालक्ष्मी है🚩🙏🏻 और स्वयं श्री मन्न नारायण जिनके श्री चरणों में बैठते है वह हमारी #किशोरी_राधै_रानी_जू है🌿💖🙏🏻 🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼🥀🌼 तो🙏🏻 प्रेम से कहिए🌿💞राधै राधै🌿💖🙏🏻#हमारो_धन_राधा_श्री_राधा_श्री_राधा🌿💖🙏🏻#जीवन_धन_राधा_राधा_राधा_राधा_राधा🌿💖🙏🏻#परम_धन_राधा_राधा_राधा_राधा_राधा🌿💖🙏🏻#मेरे_कान्हा🌿💖🙏🏻 हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे🚩🏹🙏🏻 हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे🌿💖🙏🏻 💖🌿हरे कृष्णा🙏🏻हरे कृष्णा🌿💖#जय_जय_श्री_राधे💖🙏🏻 #राधै_राधै💖🙏🏻#हरिहर_ब्रम्हा_नमोस्तुभ्यम्🚩🙏🏻#गर्व_से_कहो_हम_हिंदू_है🚩💪🏻#अखंड_हिंदू🚩💪🏻#हमारी_धर्म_संस्कृति_हमारी_पहचान🚩☝🏻#जय_सनातन_जय_श्री_राम🚩🏹🙏🏻जय श्री राधे कृष्णा जी 🍀🌹🌻शुभ संध्या वंदनम् हरि के चरणों में 🌿❤🍂जय श्री राधे कृष्णा जी 🍀🌹🌻शुभ संध्या वंदनम् हरि के चरणों 💓💓 सावली, सूरत पे , मोहन,… दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना, हो गया … मेरा …दिल दीवाना , हो गया -2सावली , सूरत पे , मोहन, …दिल दीवाना , हो गया….-2🧡🧡 💟💟💞💞एक तो , तेरे , नयन तिरछे …. , दूसरा , काजल , लगा -2तीसरा… तीसरा , नजरे मिलाना … दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गयादिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💕💕 💖💖एक तो, तेरे होठ, पतले…. , दूसरा ,लाली लगी… -2तीसरा….तीसरा , तेरा मुस्कुराना……दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💗💗 🙏🙏🙏एक तो, तेरे हाथ , कोमल ….. , दूसरा मेहँदी लगी..-2तीसरा…तीसरा , मुरली बजाना….दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2💜💜दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया 💗💗एक तो , तेरे पाँव , नाजुक … , दूसरा , पायल बंधी ….-2तीसरा…..तीसरा , घुंघरू बजाना …..दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया एक तो , तेरे भोग , छप्पन …. , दूसरा , माखन धरा …-2तीसरा….तीसरा , खीचड़े , का खाना…..दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया💓💓💓💓 💖💖💖एक तो , तेरे साथ , राधा …. , दूसरा , रुक्मण खड़ी …2तीसरा …तीसरा , मीरा , का आना…..दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गया❤❤ 💖💖💖एक तो , तुम , देवता हो … , दूसरा , प्रियतम मेरे ….2तीसरा … तीसरा , सपनो , में आना …दिल दीवाना हो गया …सावली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया….-2दिल दीवाना हो गया … मेरा …दिल दीवाना हो गयाश्री श्याम आशीर्वाद ।। श्री हनुमत कृपा ।।💓💓💓💓🌺‼️श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी‼️🌺 🌺‼️हे नाथ नारायण वासुदेवा‼️🌺🌺‼️श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी‼️🌺 🌺‼️हे नाथ नारायण वासुदेवा‼️🌺🌺‼️श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी‼️🌺 🌺‼️हे नाथ नारायण वासुदेवा‼️🌺 राधे राधेBy वनिता कासनियां पंजाब!! 🌼🥀!! जय श्री राधे कृष्णा !!🥀🌼#_जय_सनातन⛳ #Jai_Sanatan⛳ #JaiSanatan⛳ #जय_सनातन⛳

┅•••⊰❉‼श्री राधे राधे ‼❉⊱•••┅ *🌹💖 #जय_श्री_कृष्णा जी 💖🌹* *━❀꧁श्री राधे🌹राधे🌹 जी꧂❀-----* ╲\╭┓                    *मेरे लिए तो .प्रेम का  मतलब ही राधाकृष्ण हैं* जहाँ दो नही बस एक ही नाम हैं *राधाकृष्ण* , जहाँ आँखे *कान्हा* की हैं,  *श्रंगार राधा* का हैं, जहाँ *बंसी कान्हा* की हैं,  थिरकन में *पायल राधा* की हैं,  जहाँ रिश्ता नही   फिर भी रुह बंधी हुई हैं, जहाँ दो नही बस एक ही नाम हैं *राधाकृष्ण* .. *जय श्री राधेकृष्णा* ╭🌷 ╯ ⚛🙏⚛ ┗╯\╲ 🌹 #Զเधे_Զเधे_जी.....💦          ❀#_जय_श्री__कृष्ण 🌱                 💥#राधे_राधे❀༄༅🌹 #राधा_रानी💖 के एक बार नाम लेने की कीमत #महिमा एक बार एक व्यक्ति था। वह एक संत जी के पास गया। और कहता है की संत जी, मेरा एक बेटा है। वो न तो पूजा पाठ करता है और न ही भगवान का नाम लेता है। आप कुछ ऐसा कीजिये की उसका मन भगवान में लग जाये। संत कहते है ठीक है बेटा एक दिन तू उसे मेरे पास लेकर आ जा। अगले दिन वो व्यक्ति अपने बेटे को...

🦚❤️‼️🙏{{#जय_श्री.}} 🙏‼️❤️🦚🌷‼️-----♨️💓♨️------‼️🌷 (`“ •. (`“•.राधे🌷 राधे¸.•“´) ¸. •“´)❤️«"•🦚#राधा_माला_सकीर्तन_पोस्ट🦚•“»❤️ (¸. • “´(¸.•“´🌷 `“•)` “° •.¸,🌷#श्री_राधा_प्यारी_गुरूप ‼️🌷💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💕📿 राधा माला संकीर्तन पोस्ट📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕 राधे 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 राधे 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 💚♥️💚 सुप्रभात वंदन हरी चरणो में 💚♥️💚💞🌹राधे कृष्णा के भक्तो आए सभी राधा दरबार में सब मिलकर सकीर्तन करते हैं राधे राधे राधे राधे,,,🌹💞💚💚💚 !!!श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!! !! Զเधॆ Զเधॆ !! ‼जय श्री कृष्ण‼ ─╼⃝𖠁 🙏🏻💔श्री राधे💔🙏🏻 𖠁⃝╾─•* ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💚💚💚💚💚💚💚❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💚💚💚💚💚💚💚 ┈┉┅━☞🙏☜━┅┉┈ 💞🌸🌹🌸💞 🌹🌸🌸🌹 𝐉𝐚𝐢 𝐒𝐡𝐫𝐢 Radhey 𝐊𝐫𝐢𝐬𝐡𝐧𝐚 𝐣𝐢 ┊┊┊┊┊ ┊┊┊┊💚 राधे राधे ┊┊┊💚 राधे राधे राधे ┊┊💚 राधे राधे राधे राधे ┊💚 राधे राधे राधे राधे 💚 राधे राधे राधे राधे राधेश्याम तेरी बंसीपुकारे राधा नामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम 🌲🌲♥️💚♥️💚♥️💚♥️💚♥️🌲🌲श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नामश्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम🎋🎋💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🎋🎋सांवरे की बंसी को बजने से कामसांवरे की बंसी को बजने से कामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्यामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲ओ.. जमुना की लहरे बंसीबट की छैयाकिसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैयाजमुना की लहरे बंसीबट की छैया💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💛💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💛💛💛💛💛किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैयाश्याम का दीवाना तो सारा ब्रिज धामश्याम का दीवाना तो सारा ब्रिज धामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम🎋🎋💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🎋🎋सांवरे की बंसी को बजने से कामसांवरे की बंसी को बजने से काम,🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈 🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्यामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲💛💛💛ओ.. कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाएजिसके मन भाए ये उसी के गुण गाए🌲🌲💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🌲🌲कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाएजिसके मन भाए वो उसी के गुण गाए💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥कौन नहीं कौन नहीं बंसी की धुन का गुलामराधा का भी श्याम हो तो मीरा का भी श्याम🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नामश्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्यामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!! 🙏🙏 🌷!! Զเधॆ Զเधॆ !!🌷 ‼जय श्री कृष्ण‼ *•─╼⃝𖠁 ❤️❤️❤️ श्री राधे ❤️❤️❤️ 𖠁⃝╾─•* *मेरी हर बात शुरू होती है वहाँ से* *तेरे होने का एहसास हो जहां से**•─╼⃝𖠁 💚💚💚श्री राधे 💚💚💚 𖠁⃝╾─•* ༆∴━━━✿राधे✿राधे✿━━━∴༆ ╭•┄┅═❁✿❁🦚❁✿❁═┅┄•╮ 💥❁🌹*Զเधे💓Զเधे*🌹❁💥 ╰•┄┅═❁✿❁🦚❁✿❁═┅┄•🌹❤️🙏 वनिता कासनियां पंजाब.......✍️╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ ।। मंगलमय सुप्रभात ।। 🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,**हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!**༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻* राधा के हृदय मे कृष्ण राधा के सांसो मे श्री कृष्ण राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण* *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* जय श्री कृष्ण. * _Զเधे_Զเधे _**♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*मेरे बांके बिहारी जी मत छोड़ना मुझे बीच राह मे ..मैंने सब कुछ गिरवी रखा है सिर्फ तेरी चाह मे..श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास💕💕╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ ।। मंगलमय सुप्रभात ।। 🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,**हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!**༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻* राधा के हृदय मे कृष्ण राधा के सांसो मे श्री कृष्ण राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण* *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* जय श्री कृष्ण. * _Զเधे_Զเधे _**♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*

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महाभारत में सबसे महान योद्धा कौन था जो अकेले पूरे युद्ध को समाप्त कर सकता था? By वनिता कासनियां पंजाब कोई नही। अगर कर सकता तो महाभारत के युद्ध को 18 दिनों तक चलने की आवश्यकता ही नही थी।इस उत्तर को पढ़ने से पहले अनुरोध है कि अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा को कृपया थोड़ी देर अलग रख दें। हम सभी की श्रीकृष्ण में श्रद्धा है किंतु इस युद्ध के वास्तविक कारण और महत्व को समझने के लिए कृपया कुछ देर के लिए हम श्रीकृष्ण को ईश्वर ना समझ कर एक असाधारण मनुष्य मान लेते हैं ताकि दोनो पक्षों का बल अच्छे तरह से समझ सकें। आइये अब आरम्भ करते हैं।जो लोग बर्बरीक का नाम ले रहे हैं उन्हें ये बता दूं कि बर्बरीक जैसा कोई चरित्र मूल व्यास महाभारत में है ही नही। अर्थात घटोत्कच के पुत्र के रूप में बर्बरीक, अंजनपर्व एवं मेघवर्ण का वर्णन तो है लेकिन बर्बरीक की तपस्या, सिद्धि, तीन बाण, शीश दान इत्यादि का जो वर्णन है वो मूल व्यास महाभारत में नही है। वो कथा लोककथाओं में अधिक प्रसिद्ध है। और अगर था भी तो वरदान प्राप्त योद्धाओं की महाभारत में कोई कमी नही थी। इसीलिए बर्बरीक को यही पर छोड़ देते हैं।अर्जुन के दिव्यास्त्रों की भी बड़ी चर्चा होती है किंतु ये भी याद रखें कि वो अकेला नही था जिसके पास दिव्यास्त्र थे। महाभारत का युद्ध उन योद्धाओं से भरा था जिनके पास विभिन्न प्रकार के दिव्यास्त्र थे। भीष्म, द्रोण, कर्ण, अश्वत्थामा, भगदत्त, कृपाचार्य, कृतवर्मा, जयद्रथ, सुशर्मा, बाह्लीक, सुदक्षिण, श्रीकृष्ण, सात्यिकी, द्रुपद, विराट, धृतकेतु, मलयध्वज इत्यादि ऐसे योद्धा थे जिनके पास अनेकानेक दिव्यास्त्र थे।ऐसा ना समझें कि महाभारत में दिव्यास्त्रों का प्रयोग हुआ ही नही। दोनो पक्षों के योद्धाओं द्वारा कई बार दिव्यास्त्र का प्रयोग हुआ। विशेषकर भीष्म और अर्जुन के युद्ध मे कई बार दिव्यास्त्रों का प्रयोग हुआ और अर्जुन और कर्ण के अंतिम युद्ध मे तो केवल दिव्यास्त्रों का ही प्रयोग हुआ।अगर महास्त्रों (ध्यान दें, साधारण दिव्यास्त्र नही) की बात की जाए तो ये सत्य है कि अर्जुन के पास पाशुपतास्त्र था जिससे सबका नाश तत्काल किया जा सकता था किंतु पाशुपत उस युद्ध मे कभी प्रयोग ही नही किया गया। उसका एक कारण ये भी था कि पाशुपत का प्रयोग स्वयं से निर्बल शत्रु पर नही किया जा सकता था अन्यथा वो चलाने वाले का ही नाश कर देता था। महाभारत में अर्जुन के समकक्ष योद्धा गिने चुने ही थे इस लिए भी पाशुपतास्त्र का प्रयोग नही किया गया। दूसरा महाअस्त्र नारायणास्त्र अश्वथामा के पास था और उसका प्रयोग हुआ भी किन्तु श्रीकृष्ण ने पांडवों को बचा लिया। अब अगर बात करें ब्रह्मास्त्र की तो उस युग मे भीष्म, द्रोण, कर्ण, अश्वत्थामा और अर्जुन, इन पाँच योद्धाओं के पास ब्रह्मास्त्र था। इनमें से अश्वथामा के पास ब्रह्मास्त्र का अधूरा ज्ञान ही था। कर्ण को इसका पूरा ज्ञान था किंतु वो श्रापग्रस्त था इसी कारण अर्जुन से अंतिम युद्ध मे ब्रह्मास्त्र का प्रयोग ना कर सका। इसके अतिरिक्त परशुराम के पास भी ब्रह्मास्त्र था किंतु उन्होंने युद्ध मे भाग नही लिया। कुछ लोग समझते हैं कि श्रीकृष्ण के पास भी ब्रह्मास्त्र था किंतु ऐसा नही है, उनके पास ब्रह्मास्त्र होने का कोई वर्णन महाभारत में नही है। किन्तु श्रीकृष्ण तो श्रीहरि के पूर्णावतार है इसीलिए उनके पास ब्रम्हास्त्र होने, ना होने से कोई फर्क नही पड़ता।इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे दिव्यास्त्र भी थे जिनका प्रयोग केवल किसी एक योद्धा को ही था। जैसे प्रस्वापास्त्र केवल भीष्म के पास ही था, जिसका प्रयोग वे परशुराम के विरुद्ध युद्ध मे करने वाले थे किंतु किया नही। नारायणास्त्र का ज्ञान केवल अश्वथामा और श्रीकृष्ण को था और भार्गवास्त्र का ज्ञान केवल कर्ण के पास ही था। इसके अतिरिक्त सुदर्शन चक्र को केवल श्रीकृष्ण और परशुराम ही धारण कर सकते थे और पाशुपतास्त्र केवल अर्जुन के पास था। पता नही ये कितना प्रामाणिक है किंतु कई जगह वर्णन है कि भीष्म और द्रोण के पास ब्रह्मशिरा का ज्ञान भी था जो उन्हें परशुराम से मिला। ब्रह्मशिरा ब्रह्मास्त्र से 4 गुणा अधिक शक्तिशाली होता है। हालांकि परशुराम ने कर्ण को ये ज्ञान नही दिया और ना ही द्रोण ने अर्जुन और यहाँ तक कि अश्वत्थामा को भी इसका ज्ञान नही दिया।इतने वृहद विश्लेषण की आवश्यकता इसीलिए पड़ी कि आप ये समझ लें कि महाभारत में केवल अर्जुन के पास ही दिव्यास्त्र नही थे। हाँ, अन्य योद्धाओं की तुलना में उसके पास कुछ अधिक दिव्यास्त्र थे जो उसने इंद्र से प्राप्त किये थे। दूसरे कि जो ये समझते हैं कि महाभारत में दिव्यास्त्रों का प्रयोग नही हुआ वे भी गलत हैं। उस महायुद्ध में भयंकर मात्रा में दिव्यास्त्रों का प्रयोग हुआ था। उस युद्ध मे ऐसे कई योद्धा थे जो शीघ्रता से उस युद्ध को समाप्त कर सकते थे। जैसा कि श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि अगर केवल भीष्म नही होते तो वो युद्ध केवल 1 दिन में जीता जा सकता था।तो अब प्रश्न आता है कि जब महाभारत में इतने महान योद्धा थे तो वो युद्ध 18 दिनों तक क्यों खिंच गया? उत्तर है केवल श्रीकृष्ण के कारण।आप इस युद्ध के उद्देश्य को जानने का प्रयास कीजिये। श्रीकृष्ण का उद्देश्य इस युद्ध के द्वारा अधिक से अधिक योद्धाओं का नाश कराना था और वो भी दोनों ओर से। कहा जाता है कि उस समय पृथ्वी का भार इतना बढ़ गया था कि उसके बोझ से पृथ्वी फट जाती। पृथ्वी का बोझ कम करना अत्यंत आवश्यक था और श्रीकृष्ण का अवतरण वास्तव में इसी कारण हुआ था, ना कि कंस को मारने के कारण। अगर ये युद्ध जल्दी समाप्त हो जाता तो उनका ये उद्देश्य पूर्ण नही हो पाता। यही कारण है कि उनके ही कारण ये युद्ध इतने दिनों तक चला।वास्तव में श्रीकृष्ण उस युद्ध मे अद्भुत भूमिका निभा रहे थे। उन्हें दोनो ओर के योद्धाओं का नाश भी कराना था और इस बात का ध्यान भी रखना था कि पांडवों की पराजय ना हो। वो उस युद्ध मे कितने दवाब में होंगे इसका हम और आप अनुमान भी नही लगा सकते।यही कारण था कि उन्होंने युद्ध मे शस्त्र ना उठाने की प्रतिज्ञा कर ली और उनकी प्रेरणा से बलराम ने भी युद्ध मे भाग नही लिया ताकि वो युद्ध अधिक समय तक चल सके। इन दोनो के युद्ध मे भाग लेने पर संभव था कि युद्ध कुछ जल्दी समाप्त हो जाता और श्रीकृष्ण का उद्देश्य अधूरा रह जाता। जो लोग उनपर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हैं वे ये जान लें कि महाभारत के 36 वर्ष पश्चात जब यादवों की संख्या और बल बहुत अधिक बढ़ गया तो स्वयं श्रीकृष्ण और बलराम ने अपने ही यादव वंश का नाश कर दिया। गांधारी का श्राप तो बस निमित्तमात्र था।अब जाते जाते श्रीकृष्ण को एक योद्धा के रूप में भी देख लेते हैं। वे श्रीहरि के पूर्ण अवतार थे और उनकी सभी 16 कलाओं के साथ जन्में थे। श्रीहरि के सभी शस्त्र उनके पास थे किंतु इसपर भी कई युद्ध मे उन्हें भी संघर्ष करना पड़ा था। हालांकि इसके पीछे भी उनका उद्देश्य वही था जो महाभारत युद्ध के पीछे था।जैसे जरासंध से वे 18 वर्ष तक युद्ध करते रहे और उसकी सेना को समाप्त करने के बाद भी मथुरा छोड़ द्वारिका में आकर बस गए। शाल्व और उनका द्वंद 26 दिनों तक चला था। सुभद्रा के वचन के कारण जब श्रीकृष्ण और अर्जुन में युद्ध हुआ था तो वो 11 दिनों तक चलता रहा जबतक दोनो ने स्वयं युद्ध नही रोका। पौंड्रक और उनका युद्ध 16 दिनों तक चला था, एकलव्य का वध उन्होंने तीन दिन के युद्ध के पश्चात किया। जाम्बवन्त और उनका युद्ध 23 दिनों तक चला। बाणासुर के साथ उनका युद्ध 1 मास तक चला जिसके बाद अंततः भगवान शंकर को बाणासुर की सहायता के लिए आना पड़ा।इसीलिए ये जान लें कि महाभारत का युद्ध इतने दिन इसी कारण चला क्योंकि श्रीकृष्ण ऐसा ही चाहते थे। और कोई ऐसा नही था जो उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर उस युद्ध को शीघ्रता से समाप्त कर देता।आशा है आपको उत्तर तर्कसंगत लगा होगा। अब जाते जाते आपको एक प्रश्न के साथ छोड़े जा रही हूँ।"आपमे से कितने लोगों को लगता है कि वर्तमान में पृथ्वी का भार (जनसंख्या) उतारने के लिए ऐसे ही किसी महायुद्ध की आवश्यकता है?"जय श्रीकृष्ण। 🚩

महाभारत में सबसे महान योद्धा कौन था जो अकेले पूरे युद्ध को समाप्त कर सकता था? By  वनिता कासनियां पंजाब कोई नही।  अगर कर सकता तो महाभारत के युद्ध को 18 दिनों तक चलने की आवश्यकता ही नही थी। इस उत्तर को पढ़ने से पहले अनुरोध है कि अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा को कृपया थोड़ी देर अलग रख दें। हम सभी की श्रीकृष्ण में श्रद्धा है किंतु इस युद्ध के वास्तविक कारण और महत्व को समझने के लिए कृपया कुछ देर के लिए हम श्रीकृष्ण को ईश्वर ना समझ कर एक असाधारण मनुष्य मान लेते हैं ताकि दोनो पक्षों का बल अच्छे तरह से समझ सकें। आइये अब आरम्भ करते हैं। जो लोग बर्बरीक का नाम ले रहे हैं उन्हें ये बता दूं कि बर्बरीक जैसा कोई चरित्र मूल व्यास महाभारत में है ही नही। अर्थात घटोत्कच के पुत्र के रूप में बर्बरीक, अंजनपर्व एवं मेघवर्ण का वर्णन तो है लेकिन बर्बरीक की तपस्या, सिद्धि, तीन बाण, शीश दान इत्यादि का जो वर्णन है वो मूल व्यास महाभारत में नही है। वो कथा लोककथाओं में अधिक प्रसिद्ध है। और अगर था भी तो वरदान प्राप्त योद्धाओं की महाभारत में कोई कमी नही थी। इसीलिए बर्बरीक को यही पर छोड़ देते हैं। अर्जुन के दिव्यास्त्रो...

*कृष्ण ही कृष्ण....*_कृष्ण उठत कृष्ण चलत कृष्ण शाम भोर है,__कृष्ण बुद्धि कृष्ण चित्त कृष्ण मन विभोर है।_ _कृष्ण रात्रि कृष्ण दिवस कृष्ण स्वप्न शयन है,__कृष्ण काल कृष्ण कला कृष्ण मास अयन है।_ _कृष्ण शब्द कृष्ण अर्थ कृष्ण ही परमार्थ है,_ _कृष्ण कर्म कृष्ण भाग्य कृष्णहि पुरुषार्थ है।_ _कृष्ण स्नेह कृष्ण राग कृष्णहि अनुराग है,__कृष्ण कली कृष्ण कुसुम कृष्ण ही पराग है।_ _कृष्ण भोग कृष्ण त्याग कृष्ण तत्व ज्ञान है,__कृष्ण भक्ति कृष्ण प्रेम कृष्ण ही विज्ञान है।_ _कृष्ण स्वर्ग कृष्ण मोक्ष कृष्ण परम साध्य है,__कृष्ण जीव कृष्ण ब्रह्म कृष्ण ही आराध्य है।_, *जय श्री कृष्ण , 🙏🙏*

*कृष्ण ही कृष्ण....* _कृष्ण उठत कृष्ण चलत कृष्ण शाम भोर है,_ _कृष्ण बुद्धि कृष्ण चित्त कृष्ण मन विभोर है।_  _कृष्ण रात्रि कृष्ण दिवस कृष्ण स्वप्न शयन है,_ _कृष्ण काल कृष्ण कला कृष्ण मास अयन है।_  _कृष्ण शब्द कृष्ण अर्थ कृष्ण ही परमार्थ है,_  _कृष्ण कर्म कृष्ण भाग्य कृष्णहि पुरुषार्थ है।_  _कृष्ण स्नेह कृष्ण राग कृष्णहि अनुराग है,_ _कृष्ण कली कृष्ण कुसुम कृष्ण ही पराग है।_  _कृष्ण भोग कृष्ण त्याग कृष्ण तत्व ज्ञान है,_ _कृष्ण भक्ति कृष्ण प्रेम कृष्ण ही विज्ञान है।_  _कृष्ण स्वर्ग कृष्ण मोक्ष कृष्ण परम साध्य है,_ _कृष्ण जीव कृष्ण ब्रह्म कृष्ण ही आराध्य है।_ ,  *जय श्री कृष्ण , 🙏🙏*

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा , एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। उस समय यज्ञ मंडप का निर्माण सुंदर तो था ही, अद्भुत भी था वह यज्ञ मंडप इतना मनोरम था कि जल व थल की भिन्नता प्रतीत ही नहीं होती थी। जल में स्थल तथा स्थल में जल की भांति प्रतीत होती थी। बहुत सावधानी करने पर भी बहुत से व्यक्ति उस अद्भुत मंडप में धोखा खा चुके थे। एक बार कहीं से टहलते-टहलते दुर्योधन भी उस यज्ञ-मंडप में आ गया और एक तालाब को स्थल समझ उसमें गिर गया। द्रौपदी ने यह देखकर 'अंधों की संतान अंधी' कह कर उनका उपहास किया। इससे दुर्योधन चिढ़ गया। यह बात उसके हृदय में बाण समान लगी। उसके मन में द्वेष उत्पन्न हो गया और उसने पांडवों से बदला लेने की ठान ली। उसके मस्तिष्क में उस अपमान का बदला लेने के लिए विचार उपजने लगे। उसने बदला लेने के लिए पांडवों को द्यूत-क्रीड़ा में हरा कर उस अपमान का बदला लेने की सोची। उसने पांडवों को जुए में पराजित कर दिया। पराजित होने पर प्रतिज्ञानुसार पांडवों को बारह वर्ष के लिए वनवास भोगना पड़ा। वन में रहते हुए पांडव अनेक कष्ट सहते रहे। एक दिन भगवान कृष्ण जब मिलने आए, तब युधिष्ठिर ने उनसे अपना दुख कहा और दुख दूर करने का उपाय पूछा। तब श्रीकृष्ण ने कहा- 'हे युधिष्ठिर! तुम विधिपूर्वक अनंत भगवान का व्रत करो, इससे तुम्हारा सारा संकट दूर हो जाएगा और तुम्हारा खोया राज्य पुन: प्राप्त हो जाएगा।' इस संदर्भ में श्रीकृष्ण ने उन्हें एक कथा सुनाई - प्राचीन काल में सुमंत नाम का एक नेक तपस्वी ब्राह्मण था। उसकी पत्नी का नाम दीक्षा था। उसकी एक परम सुंदरी धर्मपरायण तथा ज्योतिर्मयी कन्या थी। जिसका नाम सुशीला था। सुशीला जब बड़ी हुई तो उसकी माता दीक्षा की मृत्यु हो गई। पत्नी के मरने के बाद सुमंत ने कर्कशा नामक स्त्री से दूसरा विवाह कर लिया। सुशीला का विवाह ब्राह्मण सुमंत ने कौंडिन्य ऋषि के साथ कर दिया। विदाई में कुछ देने की बात पर कर्कशा ने दामाद को कुछ ईंटें और पत्थरों के टुकड़े बांध कर दे दिए। कौंडिन्य ऋषि दुखी हो अपनी पत्नी को लेकर अपने आश्रम की ओर चल दिए। परंतु रास्ते में ही रात हो गई। वे नदी तट पर संध्या करने लगे। सुशीला ने देखा- वहां पर बहुत-सी स्त्रियां सुंदर वस्त्र धारण कर किसी देवता की पूजा पर रही थीं। सुशीला के पूछने पर उन्होंने विधिपूर्वक अनंत व्रत की महत्ता बताई। सुशीला ने वहीं उस व्रत का अनुष्ठान किया और चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में बांध कर ऋषि कौंडिन्य के पास आ गई। कौंडिन्य ने सुशीला से डोरे के बारे में पूछा तो उसने सारी बात बता दी। उन्होंने डोरे को तोड़ कर अग्नि में डाल दिया, इससे भगवान अनंत जी का अपमान हुआ। परिणामत: ऋषि कौंडिन्य दुखी रहने लगे। उनकी सारी सम्पत्ति नष्ट हो गई। इस दरिद्रता का उन्होंने अपनी पत्नी से कारण पूछा तो सुशीला ने अनंत भगवान का डोरा जलाने की बात कहीं। पश्चाताप करते हुए ऋषि कौंडिन्य अनंत डोरे की प्राप्ति के लिए वन में चले गए। वन में कई दिनों तक भटकते-भटकते निराश होकर एक दिन भूमि पर गिर पड़े। तब अनंत भगवान प्रकट होकर बोले- 'हे कौंडिन्य! तुमने मेरा तिरस्कार किया था, उसी से तुम्हें इतना कष्ट भोगना पड़ा। तुम दुखी हुए। अब तुमने पश्चाताप किया है। मैं तुमसे प्रसन्न हूं। अब तुम घर जाकर विधिपूर्वक अनंत व्रत करो। चौदह वर्षपर्यंत व्रत करने से तुम्हारा दुख दूर हो जाएगा। तुम धन-धान्य से संपन्न हो जाओगे। कौंडिन्य ने वैसा ही किया और उन्हें सारे क्लेशों से मुक्ति मिल गई।' श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनंत भगवान का व्रत किया जिसके प्रभाव से पांडव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए तथा चिरकाल तक राज्य करते रहे। (समाप्त

  अनंत चतुर्दशी व्रत कथा , एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। उस समय यज्ञ मंडप का निर्माण सुंदर तो था ही, अद्भुत भी था वह यज्ञ मंडप इतना मनोरम था कि जल व थल की भिन्नता प्रतीत ही नहीं होती थी। जल में स्थल तथा स्थल में जल की भांति प्रतीत होती थी। बहुत सावधानी करने पर भी बहुत से व्यक्ति उस अद्भुत मंडप में धोखा खा चुके थे एक बार कहीं से टहलते-टहलते दुर्योधन भी उस यज्ञ-मंडप में आ गया और एक तालाब को स्थल समझ उसमें गिर गया। द्रौपदी ने यह देखकर 'अंधों की संतान अंधी' कह कर उनका उपहास किया। इससे दुर्योधन चिढ़ गया।   यह बात उसके हृदय में बाण समान लगी। उसके मन में द्वेष उत्पन्न हो गया और उसने पांडवों से बदला लेने की ठान ली। उसके मस्तिष्क में उस अपमान का बदला लेने के लिए विचार उपजने लगे। उसने बदला लेने के लिए पांडवों को द्यूत-क्रीड़ा में हरा कर उस अपमान का बदला लेने की सोची। उसने पांडवों को जुए में पराजित कर दिया।   पराजित होने पर प्रतिज्ञानुसार पांडवों को बारह वर्ष के लिए वनवास भोगना पड़ा। वन में रहते हुए पांडव अनेक कष्ट सहते रहे। एक दिन भगवान कृष्ण जब मिलने आए,...

श्री कृष्ण के बारे में कुछ रोचक जानकारिया By वनिता कासनियां पंजाब कृष्ण को पूर्णावतार कहा गया है। कृष्ण के जीवन में वह सबकुछ है जिसकी मानव को आवश्यकता होती है। कृष्ण गुरु हैं, तो शिष्य भी। आदर्श पति हैं तो प्रेमी भी। आदर्श मित्र हैं, तो शत्रु भी। वे आदर्श पुत्र हैं, तो पिता भी। युद्ध में कुशल हैं तो बुद्ध भी। कृष्ण के जीवन में हर वह रंग है, जो धरती पर पाए जाते हैं इसीलिए तो उन्हें पूर्णावतार कहा गया है। मूढ़ हैं वे लोग, जो उन्हें छोड़कर अन्य को भजते हैं… ‘भज गोविन्दं मुढ़मते।आठ का अंककृष्ण के जीवन में आठ अंक का अजब संयोग है। उनका जन्म आठवें मनु के काल में अष्टमी के दिन वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म हुआ था। उनकी आठ सखियां, आठ पत्नियां, आठमित्र और आठ शत्रु थे। इस तरह उनके जीवन में आठ अंक का बहुत संयोग है।कृष्ण के नामनंदलाल, गोपाल, बांके बिहारी, कन्हैया, केशव, श्याम, रणछोड़दास, द्वारिकाधीश और वासुदेव। बाकी बाद में भक्तों ने रखे जैसे ‍मुरलीधर, माधव, गिरधारी, घनश्याम, माखनचोर, मुरारी, मनोहर, हरि, रासबिहारी आदि।कृष्ण के माता-पिताकृष्ण की माता का नाम देवकी और पिता का नाम वसुदेव था। उनको जिन्होंने पाला था उनका नाम यशोदा और धर्मपिता का नाम नंद था। बलराम की माता रोहिणी ने भी उन्हें माता के समान दुलार दिया। रोहिणी वसुदेव की प‍त्नी थीं।कृष्ण के गुरुगुरु संदीपनि ने कृष्ण को वेद शास्त्रों सहित 14 विद्या और 64 कलाओं का ज्ञान दिया था। गुरु घोरंगिरस ने सांगोपांग ब्रह्म ‍ज्ञान की शिक्षा दी थी। माना यह भी जाता है कि श्रीकृष्ण अपने चचेरे भाई और जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ के प्रवचन सुना करते थे।कृष्ण के भाईकृष्ण के भाइयों में नेमिनाथ, बलराम और गद थे। शौरपुरी (मथुरा) के यादववंशी राजा अंधकवृष्णी के ज्येष्ठ पुत्र समुद्रविजय के पुत्र थे नेमिनाथ। अंधकवृष्णी के सबसे छोटे पुत्र वसुदेव से उत्पन्न हुए भगवान श्रीकृष्ण। इस प्रकार नेमिनाथ और श्रीकृष्ण दोनों चचेरे भाई थे। इसके बाद बलराम और गद भी कृष्ण के भाई थे।कृष्ण की बहनेंकृष्ण की 3 बहनें थी :1. एकानंगा (यह यशोदा की पुत्री थीं)।2. सुभद्रा : वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी से बलराम और सुभद्र का जन्म हुआ। वसुदेव देवकी के साथ जिस समय कारागृह में बंदी थे, उस समय ये नंद के यहां रहती थीं। सुभद्रा का विवाह कृष्ण ने अपनी बुआ कुंती के पुत्र अर्जुन से किया था। जबकि बलराम दुर्योधन से करना चाहते थे।3. द्रौपदी : पांडवों की पत्नी द्रौपदी हालांकि कृष्ण की बहन नहीं थी, लेकिन श्रीकृष्‍ण इसे अपनी मानस ‍भगिनी मानते थे।4.देवकी के गर्भ से सती ने महामाया के रूप में इनके घर जन्म लिया, जो कंस के पटकने पर हाथ से छूट गई थी। कहते हैं, विन्ध्याचल में इसी देवी का निवास है। यह भी कृष्ण की बहन थीं।कृष्ण की पत्नियांरुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, मित्रवंदा, सत्या, लक्ष्मणा, भद्रा और कालिंदी।कृष्ण के पुत्ररुक्मणी से प्रद्युम्न, चारुदेष्ण, जम्बवंती से साम्ब, मित्रवंदा से वृक, सत्या से वीर, सत्यभामा से भानु, लक्ष्मणा से…, भद्रा से… और कालिंदी से…।कृष्ण की पुत्रियांरुक्मणी से कृष्ण की एक पुत्री थीं जिसका नाम चारू था।कृष्ण के पौत्रप्रद्युम्न से अनिरुद्ध। अनिरुद्ध का विवाह वाणासुर की पुत्री उषा के साथ हुआ था।कृष्ण की 8 सखियांराधा, ललिता आदि सहित कृष्ण की 8 सखियां थीं। सखियों के नाम निम्न हैं-ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इनके नाम इस तरह हैं- चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा तथा भद्रा।कुछ जगह ये नाम इस प्रकार हैं- चित्रा, सुदेवी, ललिता, विशाखा, चम्पकलता, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रग्डदेवी और सुदेवी।इसके अलावा भौमासुर से मुक्त कराई गई सभी महिलाएं कृष्ण की सखियां थीं। कुछ जगह पर- ललिता, विशाखा, चम्पकलता, चित्रादेवी, तुङ्गविद्या, इन्दुलेखा, रंगदेवी और कृत्रिमा (मनेली)। इनमें से कुछ नामों में अंतर है।कृष्ण के 8 मित्रश्रीदामा, सुदामा, सुबल, स्तोक कृष्ण, अर्जुन, वृषबन्धु, मन:सौख्य, सुभग, बली और प्राणभानु।इनमें से आठ उनके साथ मित्र थे। ये नाम आदिपुराण में मिलते हैं। हालांकि इसके अलावा भी कृष्ण के हजारों मित्र थे जिसनें दुर्योधन का नाम भी लिया जाता है।कृष्ण के शत्रुकंस, जरासंध, शिशुपाल, कालयवन, पौंड्रक। कंस तो मामा था। कंस का श्वसुर जरासंध था। शिशुपाल कृष्ण की बुआ का लड़का था। कालयवन यवन जाति का मलेच्छ जा था जो जरासंध का मित्र था। पौंड्रक काशी नरेश था जो खुद को विष्णु का अवतार मानता था।कृष्ण के शिष्यकृष्ण ने किया जिनका वध : ताड़का, पूतना, चाणूड़, शकटासुर, कालिया, धेनुक, प्रलंब, अरिष्टासुर, बकासुर, तृणावर्त अघासुर, मुष्टिक, यमलार्जुन, द्विविद, केशी, व्योमासुर, कंस, प्रौंड्रक और नरकासुर आदि।कृष्ण चिन्हसुदर्शन चक्र, मोर मुकुट, बंसी, पितांभर वस्त्र, पांचजन्य शंख, गाय, कमल का फूल और माखन मिश्री।कृष्ण लोकवैकुंठ, गोलोक, विष्णु लोक।कृष्ण ग्रंथ : महाभारत और गीताकृष्ण का कुलयदुकुल। कृष्ण के समय उनके कुल के कुल 18 कुल थे। अर्थात उनके कुल की कुल 18 शाखाएं थीं। यह अंधक-वृष्णियों का कुल था। वृष्णि होने के कारण ये वैष्णव कहलाए। अन्धक, वृष्णि, कुकर, दाशार्ह भोजक आदि यादवों की समस्त शाखाएं मथुरा में कुकरपुरी (घाटी ककोरन) नामक स्थान में यमुना के तट पर मथुरा के उग्रसेन महाराज के संरक्षण में निवास करती थीं।शाप के चलते सिर्फ यदु‍ओं का नाश होने के बाद अर्जुन द्वारा श्रीकृष्ण के पौत्र वज्रनाभ को द्वारिका से मथुरा लाकर उन्हें मथुरा जनपद का शासक बनाया गया। इसी समय परीक्षित भी हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठाए गए। वज्र के नाम पर बाद में यह संपूर्ण क्षेत्र ब्रज कहलाने लगा। जरासंध के वंशज सृतजय ने वज्रनाभ वंशज शतसेन से 2781 वि.पू. में मथुरा का राज्य छीन लिया था। बाद में मागधों के राजाओं की गद्दी प्रद्योत, शिशुनाग वंशधरों पर होती हुई नंद ओर मौर्यवंश पर आई। मथुराकेमथुर नंदगाव, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, मधुवन और द्वारिका।कृष्ण पर्वश्री कृष्ण ने ही होली और अन्नकूट महोत्सव की शुरुआत की थी। जन्माष्टमी के दिन उनका जन्मदिन मनाया जाता है।मथुरा मंडल के ये 41 स्थान कृष्ण से जुड़े हैं,,,,,मधुवन, तालवन, कुमुदवन, शांतनु कुण्ड, सतोहा, बहुलावन, राधा-कृष्ण कुण्ड, गोवर्धन, काम्यक वन, संच्दर सरोवर, जतीपुरा, डीग का लक्ष्मण मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर, जल महल, कमोद वन, चरन पहाड़ी कुण्ड, काम्यवन, बरसाना, नंदगांव, जावट, कोकिलावन, कोसी, शेरगढ, चीर घाट, नौहझील, श्री भद्रवन, भांडीरवन, बेलवन, राया वन, गोपाल कुण्ड, कबीर कुण्ड, भोयी कुण्ड, ग्राम पडरारी के वनखंडी में शिव मंदिर, दाऊजी, महावन, ब्रह्मांड घाट, चिंताहरण महादेव, गोकुल, संकेत तीर्थ, लोहवन और वृन्दावन। इसके बाद द्वारिका, तिरुपति बालाजी, श्रीनाथद्वारा और खाटू श्याम प्रमुख कृष्ण स्थान है।भक्तिकाल के कृष्ण भक्त:सूरदास, ध्रुवदास, रसखान, व्यासजी, स्वामी हरिदास, मीराबाई, गदाधर भट्ट, हितहरिवंश, गोविन्दस्वामी, छीतस्वामी, चतुर्भुजदास, कुंभनदास, परमानंद, कृष्णदास, श्रीभट्ट, सूरदास मदनमोहन, नंददास, चैतन्य महाप्रभु आदि। कृष्णा जिनका नाम हैगोकुल जिनका धाम हैऐसे श्री कृष्ण को मेराबारम्बार प्रणाम है। 🙏🌷जय श्रीराधे कृष्ण *🌷🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹10🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹*ज्ञान के बाद यदि अहंकार का जन्म होता है, तो वो ज्ञान जहर है।**किन्तु......**ज्ञान के बाद यदि नम्रता का जन्म होता है, तो यही ज्ञान अमृत होता है॥*🌹🌹जय प्रथम पूज्य श्रीगणेश ज़ी 🌹🌹*सत्य वह दौलत है जिसे, पहले खर्च करो और जन्म जन्मांतर /जिंदगी भर आनंद पाओ,**झुठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख पाओ पर जन्म जन्मांतर तक चुकाते रहो।**!!!...जिस तरह थोडी सी औषधि., भयंकर रोगों को शांत कर देती है...,**उसी तरह....ईश्वर की थोडी सी स्तुति....बहुत से कष्ट और दुखों का नाश कर देती है...!!!"* *जय श्री गणेश*🙏🙏मन उजियारा जग उजियारा|,,,,,,,,वैदिक ग्रंथों में मन को सर्वशक्तिमान ईश्वर का स्वरूप ब्रह्म संबोधित किया है। उसे सृष्टि का निर्माता ब्रह्मा कहा गया है। इस जगत में इससे अधिक बलशाली कुछ नहीं है। यह प्रकाशक होकर ज्योति रूप में विद्यमान विद्या (ज्ञान) का द्योतक है। त्रिकाल इसमें ही है। इसके शुचि होने से दुनिया में हिंसा, द्वेष, द्वंद्व सहित समस्त अनीति से होने वाले विनाश से बचा जा सकता है !उपनिषदों के अनुसार मन अभीष्ट सिद्धि में वाहन का कर्म करता है। इससे असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। मन में निवास करने वाली इच्छाशक्ति और उत्साह को पति-पत्नी के संबंध से वर्णित किया गया है। संकल्प (विचार) से इच्छाशक्ति का जन्म हुआ है। संकल्प मन से ही उत्पन्न होने पर सफल होता है। संकल्प शक्ति (विचार शक्ति) से किसी भी आध्यात्मिक, भौतिकीय क्षेत्र पर विजय प्राप्त की जा सकती है। इसके अभाव में चींटी मारना भी दुष्कर कर्म है।सा ते काम दुहिता धेनुरुच्यते,यामाहुर्वाचं कवयो विराजम्‌।तया सपत्नान्‌ परि वृङ्ग्धि ये मम,पर्येनान्‌ प्राणः पशवो जीवनं वृणक्तुअथर्ववेद 9.2.5अर्थात्‌ हे इच्छाशक्ति! उस तुम्हारी पुत्री को कामधेनु कहते हैं, जिनको विद्वान्‌जन विराट वाणी कहते हैं। उस वाणी से मेरे शत्रुओं का नाश करो। इन शत्रुओं को प्राणशक्ति, पशुधन और जीवन पूर्णतया छोड़ दें।जिस प्रकार मन में भावों का उदय होता है, उसी तरह की वाणी व व्यवहार दृश्यमान होता है। जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु है, उसका रिश्ता मन से सीधा है। जिसकी ताकत अणु-परमाणु अस्त्र-शस्त्र से अधिक है। जिसकी गति से अधिक किसी की भी चाल नहीं है। जिसके संचालन के लिए किसी बृहत्‌ भौतिक प्रबंधन की जरूरत नहीं है। जो जनसामान्य में असामान्य होकर सदैव विराजमान है। इस रत्नरूपी लक्ष्मी की पूजा व प्रयोग करके हम अपने जीवन को समृद्ध बना सकते हैं।मन की पवित्रता एवं विचार शक्ति के माध्यम से साधनहीन वन में तप करके जनकल्याण के लिए जो सूत्र हमारे ऋषियों ने दिए, वे विज्ञान की संतृप्त अवस्था के नाम से जाने जाते हैं। इससे अधिक मूल्यवान लक्ष्मी कुछ नहीं है।हमारी मन की शक्ति में शुद्ध-पवित्र विचार आएं एवं इन संकल्प को प्राप्त करने की इच्छाशक्ति सभी को मिले। जो प्रत्येक जन के लिए सहज-सुलभ हैं। यही शुभकामना है।।।पशुशाला और गौशाला में भेद।।भगवान् शिव ने लक्षणा-शब्द शक्ति के रूप में गौशाला की परिभाषा को परिभाषित करते हुए कहते हैं:-स्वगां भोजित्वा तु यत्फलं लभेत नर:।द्विगुणं तस्य लभते परगां भोजयेद् यदि।गुरोर्गां भोजयित्वा तु चतुर्गुणफलं लभेत्।। संदर्भ:-श्री गौ तंत्र २.१४-१५भावार्थ:- स्वयं की गौ की सेवा करने से उसके ग्रास देने से जो पुण्य प्राप्त होता हैं, उससे दुगुना पुण्य दूसरे द्वारा छोड़ी हुई गौ की सेवा करने से होता है। अगर गुरु द्वारा स्थापित गौशाला में गौओं की सेवा की जाए तो उसका चारगुणा ज्यादा पुण्य प्राप्त होता हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि गुरु द्वारा संचालित गौशाला में जो गौएं हैं उनकी महिमा का नित गान होता हैं, वे सब गौएं सबला हैं, प्रसन्न रहती हैं, वहां आने वाले भक्त गौ महिमा से परिचित होते हैं और वहां गाय पशु नहीं 'माता' कहलाती हैं इसलिए चारगुणा अधिक पुण्य है। जबकि अन्य जगह पे जो गौएं घूम रही हैं,उनको घर में लाकर पूजने से अधिक पुण्य है। अर्थात् जहां गौ महिमा नहीं हैं यदि गोग्रास देने वाला गौ महिमा से परिचित नहीं हैं तो गौ भी अवला रूप में रहती है और सेवा का उतना ही पुण्य प्राप्त होता हैं जितना किसी पशु पर दया करने का पुण्य है।ॐ जगदम्बायै च विद्महे पशुरूपायै धीमहि सा नो धेनु: प्रचोदयात्।।गाय पशु रूप में होते हुए भी जगदम्बा हैं और यह देवी हमें मोक्ष की राह पर ले जाएगी किन्तु यह तभी सम्भव है जब सेवक स्वयं को गोपुत्र मानकर और गौ को माता मानकर उसकी रक्षा एव सेवा करें और गौ महिमा से परिचित हो!Note ; कृपया पोस्ट के साथ ही देवलोक गौशाला का page भी लाइक करें और हमेशा के लिए सत्संग का लाभ उठाएं ! किसी भी गौशाला में दान देकर गौवंश को बचाये और देवताओं का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करे ! साथ ही अपने प्रारब्ध ( भाग्य ) में पुण्य संचित करे ! यह एक ऐसा पुण्य है जिससे इहलोक में देवताओ से सुख समृद्धि मिलती है एवं परलोक में स्वर्ग ! == सर्वदेवमयी यज्ञेश्वरी गौमाता को नमन🙏🌺🙏🌺 #😇धार्मिक कहानियाँ📝 #🌺शेयरचैट पर नंदलाला🙏 #🙏श्री कृष्ण वचन🌹 #🙏🏻कृष्णा प्रेम❤️

श्री कृष्ण के बारे में कुछ रोचक जानकारिया By वनिता कासनियां पंजाब कृष्ण को पूर्णावतार कहा गया है। कृष्ण के जीवन में वह सबकुछ है जिसकी मानव को आवश्यकता होती है। कृष्ण गुरु हैं, तो शिष्य भी। आदर्श पति हैं तो प्रेमी भी। आदर्श मित्र हैं, तो शत्रु भी। वे आदर्श पुत्र हैं, तो पिता भी। युद्ध में कुशल हैं तो बुद्ध भी। कृष्ण के जीवन में हर वह रंग है, जो धरती पर पाए जाते हैं इसीलिए तो उन्हें पूर्णावतार कहा गया है। मूढ़ हैं वे लोग, जो उन्हें छोड़कर अन्य को भजते हैं… ‘भज गोविन्दं मुढ़मते। आठ का अंक कृष्ण के जीवन में आठ अंक का अजब संयोग है। उनका जन्म आठवें मनु के काल में अष्टमी के दिन वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म हुआ था। उनकी आठ सखियां, आठ पत्नियां, आठमित्र और आठ शत्रु थे। इस तरह उनके जीवन में आठ अंक का बहुत संयोग है। कृष्ण के नाम नंदलाल, गोपाल, बांके बिहारी, कन्हैया, केशव, श्याम, रणछोड़दास, द्वारिकाधीश और वासुदेव। बाकी बाद में भक्तों ने रखे जैसे ‍मुरलीधर, माधव, गिरधारी, घनश्याम, माखनचोर, मुरारी, मनोहर, हरि, रासबिहारी आदि। कृष्ण के माता-पिता कृष्ण की माता का नाम देवकी और पिता का...

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कृष्ण भगवान के भजन लिरिक्स - Krishna Bhajan Lyrics By वनिता कासनियां पंजाब   कृष्ण भगवान के भजन लिरिक्स येते मी माघारी कान्हा जरा थांब ना लिरिक्स  काली कमली वाला मेरा यार है कृष्ण भजन लिरिक्स लिरिक्स July 09, 2021 अरे द्वारपालो कन्हैया से कहदो दर पे सुदामा ककरीब आ गया है लिरिक्स मुरली वाले मुरली बजा कृष्ण भजन लिरिक्स जरा धीरे से बजाना बंसी बजाने वाले कृष्ण भजन लिरिक्स  सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया लिरिक्स वो मुरली याद आती है सुन कान्हा सुन भजन लिरिक्स घर घर में बस रहा है मेरा श्याम खाटू वाला भजन लिरिक्स बिगड़ी किस्मत को जगा दे ऐसा मेरा श्याम है लिरिक्स कौन कहता है भगवान आते नहीं भजन लिरिक्स कृष्णा माझ्या कड़े पाहू नको रे माझी घागर गेली फुटून  गौळण लिरिक्स कृष्णा तुला मी ताकीद करते मराठी  गौळण लिरिक्स तेरी गलियों का हु आशिक तू एक नगीना है भजन लिरिक्स कन्हैया रे तेरे बिना भी क्या जीना भजन लिरिक्स मुरली वाले ओ बंसी वाले बंसी बजादे मुरली सुनादे लिरिक्स सांगू कुणाला बोलू कुणाला बघतोय मुरली वाला वाट माझी लिरिक्स किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाये भजन लिरिक्स एक...